22-10-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - महावीर बनो, माया के तूफानों से लड़ने के बजाए अचल-अडोल बनो''

प्रश्नः-
ब्रह्मा बाबा के सामने अनेक हंगामें होते भी कभी रंज नहीं हुए - क्यों?

उत्तर:-
क्योंकि बाबा को नशा था कि हमें बाप से वर्सा लेना है। यह तो सब कल्प पहले मुआफिक हो रहा है नथिंग न्यु। गालियाँ तो सबसे अधिक बाप को मिली। फिर श्रीकृष्ण को भी गाली देते। अगर हमें भी गाली खानी पड़े तो क्या बड़ी बात। दुनिया हमारी बातों को जानती ही नहीं तो जरूर गाली देगी इसलिए कोई भी बात में रंज नहीं हुआ। ऐसे ही फालो फादर।

गीत:-
भोलेनाथ से निराला....

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) श्रीमत पर चलने की पूरी-पूरी हिम्मत रखनी है। किसी भी बात में डरना वा रंज (नाराज) नहीं होना है।

2) अपनी रचना अपने हाथ में रखनी है। उन्हें विकारों से बचाना है। पावन बनने की राय देनी है।

वरदान:-
सदा बाप के सम्मुख रह खुशी का अनुभव करने वाले अथक और आलस्य रहित भव

कोई भी प्रकार के संस्कार या स्वभाव को परिवर्तन करने में दिलशिकस्त होना या अलबेलापन आना भी थकना है, इससे अथक बनो। अथक का अर्थ है जिसमें आलस्य न हो। जो बच्चे ऐसे आलस्य रहित हैं वे सदा बाप के सम्मुख रहते और खुशी का अनुभव करते हैं। उनके मन में कभी दु:ख की लहर नहीं आ सकती इसलिए सदा सम्मुख रहो और खुशी का अनुभव करो।

स्लोगन:-
सिद्धि स्वरूप बनने के लिए हर संकल्प में पुण्य और बोल में दुआयें जमा करते चलो।

ये अव्यक्त इशारे - परोपकार की भावना से सम्पन्न बन अपकारी पर भी उपकार करो

जिसका आपके प्रति शुभ भाव है उसके प्रति आप भी शुभ भाव रखते हो, उपकारी पर उपकार करते हो, यह कोई बड़ी बात नहीं है। लेकिन कोई आपको बार-बार गिराने की कोशिश करे, आपके मन को डगमग करे, फिर भी आपको उसके प्रति सदा शुभचिंतक का, अचल-अटल भाव हो, बात के कारण भाव न बदले, कोई अपकार करे, आप एक सेकेण्ड में अपकार को उपकार में परिवर्तित कर दो तब कहेंगे कमाल।