23-10-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - ब्लड कनेक्शन में ही दु:ख है, तुम्हें उसका
त्याग कर आपस में आत्मिक लव रखना है, यही सुख और आनंद का आधार है''
प्रश्नः-
विजय माला में
आने के लिए विशेष कौन सा पुरुषार्थ चाहिए?
उत्तर:-
विजय माला में
आना है तो विशेष होली (पवित्र) बनने का पुरुषार्थ करो। जब पक्के संन्यासी अर्थात्
निर्विकारी बनेंगे तब विजय माला का दाना बनेंगे। कोई भी कर्मबन्धन का हिसाब-किताब
है तो वारिस नहीं बन सकते, प्रजा में चले जायेंगे।
गीत:-
महफिल में जल
उठी शमा परवानों के लिए....
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
जैसे बापदादा बच्चों को कभी ख़फा (नाराज़) नहीं करते, ऐसे तुम बच्चों को भी किसी को
नाराज़ नहीं करना है, आपस में आन्तरिक लव से रहना है। कभी गुस्सा नहीं करना है।
2) पीस और ब्लिस का
वरदान लेने के लिए शमा पर पूरा फिदा होना है। पढ़ाई से सुप्रीम पीस और हैपीनेस का
गॉडली अधिकार लेना है।
वरदान:-
अपने
प्रत्यक्ष प्रमाण द्वारा बाप को प्रत्यक्ष करने वाले श्रेष्ठ तकदीरवान भव
कोई भी बात को स्पष्ट
करने के लिए अनेक प्रकार के प्रमाण दिये जाते हैं। लेकिन सबसे श्रेष्ठ प्रमाण
प्रत्यक्ष प्रमाण है। प्रत्यक्ष प्रमाण अर्थात् जो हो, जिसके हो उसकी स्मृति में
रहना। जो बच्चे अपने यथार्थ वा अनादि स्वरूप में स्थित रहते हैं वही बाप को
प्रत्यक्ष करने के निमित्त हैं। उनके भाग्य को देखकर भाग्य बनाने वाले की याद स्वत:
आती है।
स्लोगन:-
अपने रहम की
दृष्टि से हर आत्मा को परिवर्तन करने वाले ही पुण्य आत्मा हैं।
ये अव्यक्त इशारे -
परोपकार की भावना से सम्पन्न बन अपकारी पर भी उपकार करो
कोई अपने संस्कार वा
स्वभाव के कारण आपके सामने परीक्षा के रुप में आये लेकिन आप सेकेण्ड में अपने
श्रेष्ठ संस्कार से, एक की स्मृति से ऐसी आत्मा के प्रति भी रहमदिल का संस्कार वा
स्वभाव धारण कर लो - यही है उपकार करना।