24-06-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“इस कर्मक्षेत्र पर
कर्म अनादि चीज़ है, तुम्हें कर्म छोड़ना नहीं है लेकिन कर्मयोगी बनना है''
(जगदम्बा माँ के स्मृति दिवस पर सुनाने के लिए, उनके द्वारा उच्चारे हुए मधुर
महावाक्य)
वरदान:-
बाप-दादा के
साथ द्वारा माया को दूर से ही मूर्छित करने वाले मायाजीत, जगतजीत भव
जैसे बाप के स्नेही
बने हो ऐसे बाप को साथी बनाओ तो माया दूर से ही मूर्छित हो जायेगी। शुरू-शुरू का जो
वायदा है तुम्हीं से खाऊं, तुम्हीं से बैठूं, तुम्हीं से रूह को रिझाऊं...इसी वायदे
प्रमाण सारी दिनचर्या में हर कार्य बाप के साथ करो तो माया डिस्टर्ब कर नहीं सकती,
उसका डिस्ट्रक्शन हो जायेगा। तो साथी को सदा साथ रखो, साथ की शक्ति से वा मिलन में
मगन रहने से मायाजीत, जगतजीत बन जायेंगे।
स्लोगन:-
अपनी ऊंची वृत्ति से प्रवृत्ति की परिस्थितियों को चेंज करो।
ये अव्यक्त इशारे -
सदा हर्षित रहने के लिए अपनी नेचर को सरल बनाओ, सहनशील बनो।
अव्यक्त स्थिति रूपी
दर्पण को साफ और स्पष्ट करने के लिए सरलता, श्रेष्ठता और सहनशीलता इन तीन बातों पर
ध्यान दो। अगर तीनों में से एक भी बात की कमी है तो दर्पण पर भी कमी का दाग दिखाई
पड़ेगा इसलिए जो भी कार्य करते हो, उसमें साधारणता दिखाई न दे। साधारणपन को
श्रेष्ठता में बदली करो, हर कार्य में सहनशीलता और वाणी में सरलता को धारण करो तब
सर्विस में सफलता दिखाई देगी।