25-06-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - पावन बनने का एकमात्र उपाय है - बाप की याद,
याद की मेहनत ही अन्त में काम आयेगी''
प्रश्नः-
संगम पर कौन
सा तिलक दो तो स्वर्ग की राजाई का तिलक मिल जायेगा?
उत्तर:-
संगम पर यही
तिलक दो कि हम आत्मा बिन्दी हैं, हम शरीर नहीं। अन्दर में यही घोटते रहो कि हम आत्मा
हैं, हमें बाप से वर्सा लेना है। बाबा भी बिन्दी है, हम भी बिन्दी हैं। इस तिलक से
स्वर्ग की राजाई का तिलक प्राप्त होगा। बाबा कहते हैं मैं गैरन्टी करता हूँ - तुम
याद करो तो आधाकल्प के लिए रोने से छूट जायेंगे।
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
बाहर के वाह्यात (व्यर्थ) ख्यालातों को छोड़ एकान्त में बैठ याद की मेहनत करनी है।
सवेरे-सवेरे उठकर विचार सागर मंथन करना और अपना चार्ट देखना है।
2) जैसे भक्ति में
दान-पुण्य का महत्व है, ऐसे ज्ञान मार्ग में याद का महत्व है। याद से आत्मा को
एवरहेल्दी-वेल्दी बनाना है। अशरीरी रहने का अभ्यास करना है।
वरदान:-
कम्बाइन्ड रूप
की सेवा द्वारा आत्माओं को समीप सम्बन्ध में लाने वाले कम्बाइन्ड रूपधारी भव
सिर्फ आवाज द्वारा
सेवा करने से प्रजा बनती जा रही है लेकिन आवाज से परे स्थिति में स्थित हो फिर आवाज
में आओ, अव्यक्त स्थिति और फिर आवाज - ऐसे कम्बाइन्ड रूप की सेवा वारिस बनायेगी।
आवाज द्वारा प्रभावित हुई आत्मायें अनेक आवाज सुनने से आवागमन में आ जाती हैं लेकिन
कम्बाइन्ड रूपधारी बन कम्बाइन्ड रूप की सेवा करो तो उन पर किसी भी रूप का प्रभाव पड़
नहीं सकता।
स्लोगन:-
साधनों में
बेहद के वैराग्यवृत्ति की साधना मर्ज होने न दो।
ये अव्यक्त इशारे -
सदा हर्षित रहने के लिए अपनी नेचर को सरल बनाओ, सहनशील बनो।
जो सहनशील बच्चे हैं
वे अपनी सहनशीलता की शक्ति से कैसे भी कठोर संस्कार वाले को, कैसे भी कठिन कार्य को
शीतल बना देते हैं वा सहज कर देते हैं। सहनशीलता के गुण वाला गम्भीर होगा और गहराई
में जायेगा। वह कभी घबरायेगा नहीं। गहराई में जाकर सफलता प्राप्त करेगा।