26-02-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - सुख देने
वाले एक बाप को याद करो, इस थोड़े समय में योगबल जमा करो तो अन्त में बहुत काम आयेगा''
प्रश्नः-
बेहद के वैरागी
बच्चे, तुम्हें कौन सी स्मृति सदा रहनी चाहिए?
उत्तर:-
यह हमारा
छी-छी चोला है, इसे छोड़ वापिस घर जाना है - यह स्मृति सदा रहे। बाप और वर्सा याद
रहे, दूसरा कुछ भी याद न आये। यह है बेहद का वैराग्य। कर्म करते याद में रहने का ऐसा
पुरुषार्थ करना है जो पापों का बोझा सिर से उतर जाये। आत्मा तमोप्रधान से सतोप्रधान
बन जाये।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) याद का ऐसा अभ्यास करना है जो बुरे विचार वाले सामने आते ही परिवर्तन
हो जाएं। मेरा तो एक शिवबाबा, दूसरा न कोई... इस पुरुषार्थ में रहना है।
2) स्वराज्य पाने के लिए शरीर सहित जो कुछ भी है, वह बलिहार जाना है। जब इस
रूद्र यज्ञ में सब कुछ स्वाहा करेंगे तब राज्य पद मिलेगा।
वरदान:-
सहन शक्ति की
विशेषता द्वारा दूसरे के संस्कारों को परिवर्तन करने वाले दृढ़ संकल्पधारी भव
जैसे ब्रह्मा बाप ने ज्ञानी
और अज्ञानी आत्माओं द्वारा इनसल्ट सहन कर उसे परिवर्तन किया तो फालो फादर करो, इसके
लिए अपने संकल्पों में सिर्फ दृढ़ता को धारण करो। यह नहीं सोचो कि कहाँ तक होगा।
सिर्फ थोड़ा पहले लगता है कैसे होगा, कहाँ तक सहन करेंगे। लेकिन अगर आपके लिए कोई
कुछ बोलता भी है तो आप चुप रहो, सहन कर लो तो वह भी बदल जायेगा। सिर्फ दिलशिकस्त नहीं
बनो।
स्लोगन:-
संगम
पर सहन कर लेना, झुक जाना, यही सबसे बड़ी महानता है।
ये अव्यक्त इशारे
- एकता और विश्वास की विशेषता द्वारा सफलता सम्पन्न बनो
बापदादा चाहते हैं
कि बच्चों की पहले साथियों में, सेवा में, वायुमण्डल में एकता हो, फिर एक बल एक
भरोसा, एकमत हो तब सेवा में सफलता मिलेगी। जैसे नारियल तोड़कर, रिबन काटकर उद्घाटन
करते हो, ऐसे एकमत, एकबल, एक भरोसा और एकता की रिबन काटो और फिर सर्व के सन्तुष्टता,
प्रसन्नता का नारियल तोड़ो। यह पानी धरनी में डालो फिर देखो सफलता कितनी होती है।