26-06-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - इस दुनिया में निष्काम सेवा केवल एक बाप ही
करता है, बाकी तुम जो भी कर्म करते हो उसका फल अवश्य मिलता है''
प्रश्नः-
ड्रामा अनुसार
कौन सी बात 100 प्रतिशत सरटेन है? जिसकी तुम बच्चों को खुशी है?
उत्तर:-
ड्रामा अनुसार
सरटेन है कि नई राजधानी स्थापन होनी ही है। तुम बच्चों को खुशी है कि श्रीमत पर हम
अपने लिए अपनी राजधानी स्थापन कर रहे हैं। इस पुरानी दुनिया का विनाश तो होना ही
है। तुम बच्चे जितना पुरुषार्थ करेंगे उतना ऊंच पद प्राप्त होगा।
गीत:-
तुम्हें पाके
हमने जहाँ पा लिया है.....
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
जो बाप की महिमा है उस महिमा को स्वयं में लाना है। बाप समान महिमा योग्य बनना है।
पारलौकिक बाप से पवित्रता का वर्सा लेना है। पवित्र बनने से ही स्वर्ग का वर्सा
मिलेगा।
2) श्रीमत पर अपने ही
तन-मन-धन से एक आदि सनातन देवी-देवता धर्म की स्थापना करनी है।
वरदान:-
पुराने
संस्कार रूपी अस्थियों को सम्पूर्ण स्थिति के सागर में समाने वाले समान और सम्पूर्ण
भव
बाप समान वा सम्पूर्ण
बनने के लिए सृष्टि की कयामत के पहले अपनी कमजोरियों और कमियों की कयामत करो। कोई
भी उलझन का नाम निशान न रहे ऐसा अपने को उज्जवल बनाओ। जैसे जन्म परिवर्तन के बाद
पुराने जन्म की बातें भूल जाती हैं ऐसे पुरानी बातों को, पुराने संस्कारों को भस्म
करो, अस्थियों को भी सम्पूर्ण स्थिति के सागर में समा दो तब कहेंगे समान और
सम्पूर्ण।
स्लोगन:-
विस्तार को
सार में समाने की जादूगरी सीख लो तो बाप समान बन जायेंगे।
ये अव्यक्त इशारे -
सदा हर्षित रहने के लिए अपनी नेचर को सरल बनाओ, सहनशील बनो।
सहनशीलता वाले
बाहरमुखता के वायब्रेशन को ही नहीं, लेकिन मन के संकल्प भी जो उत्पन्न होते हैं, उन
संकल्पों की उत्पत्ति को देखकर भी घबरायेंगे नहीं। अपनी सहनशीलता से सामना करेंगे
और सूरत से सदैव सन्तुष्ट वा प्रसन्नचित दिखाई देंगे। उनके नैन चैन कभी भी
असन्तुष्टता के नहीं दिखाई देंगे। वे सन्तुष्टमणि होने के कारण सदा हर्षित रहते
हैं।