26-10-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - कर्म करते स्वयं को आशिक समझ एक मुझ माशूक
को याद करो, याद से ही तुम पावन बन पावन दुनिया में जायेंगे''
प्रश्नः-
महाभारत लड़ाई
के समय पर तुम बच्चों को बाप का कौन सा हुक्म (आज्ञा) वा फरमान मिला हुआ है?
उत्तर:-
बच्चे, बाप का
हुक्म वा फरमान है - देही-अभिमानी बनो। सबको सन्देश दो कि अब बाप और राजधानी को याद
करो। अपनी चलन को सुधारो। बहुत-बहुत मीठे बनो। कोई को दु:ख मत दो। याद में रहने की
आदत डालो और स्वदर्शन चक्रधारी बनो। कदम आगे बढ़ाने का पुरुषार्थ करो।
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
एक बाप में ही पूरा लव रखना है। सबको सच्चा रास्ता बताना है। धन्धा आदि करते अपनी
पूरी सम्भाल करनी है। एक की याद में रहना है।
2) सर्विस करने का
बहुत-बहुत शौक रखना है। अपनी चलन को सुधारना है, स्वदर्शन चक्रधारी बनना है।
वरदान:-
मेहनत और
महानता के साथ रूहानियत का अनुभव कराने वाले शक्तिशाली सेवाधारी भव
जो भी आत्मायें आपके
सम्पर्क में आती हैं उन्हें रूहानी शक्ति का अनुभव कराओ। ऐसी स्थूल और सूक्ष्म
स्टेज बनाओ जिससे आने वाली आत्मायें अपने स्वरूप का और रूहानियत का अनुभव करें। ऐसी
शक्तिशाली सेवा करने के लिए सेवाधारी बच्चों को व्यर्थ संकल्प, व्यर्थ बोल, व्यर्थ
कर्म की हलचल से परे एकाग्रता अर्थात् रूहानियत में रहने का व्रत लेना पड़े। इसी
व्रत से ज्ञान सूर्य का चमत्कार दिखला सकेंगे।
स्लोगन:-
बाप और सर्व
की दुआओं के विमान में उड़ने वाले ही उड़ता योगी हैं।
ये अव्यक्त इशारे -
परोपकार की भावना से सम्पन्न बन अपकारी पर भी उपकार करो
अति पाप आत्मा, अति
अपकारी आत्मा, बगुले के ऊपर भी नफरत नहीं, घृणा नहीं, निरादर नहीं लेकिन
विश्व-कल्याणकारी स्थिति में स्थित हो रहमदिल बन तरस की भावना रखते हुए सेवा का
सम्बन्ध समझकर सेवा करो, जितने होपलेस केस की सेवा करेंगे उतने ही प्राइज़ के
अधिकारी बनेंगे और नामीग्रामी विश्व-कल्याणकारी गाये जायेंगे। पीसमेकर की प्राइज़
लेंगे।