27-02-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम इस
कब्रिस्तान को परिस्तान बना रहे हो, इसलिए तुम्हारा इस पुरानी दुनिया, कब्रिस्तान
से पूरा-पूरा वैराग्य चाहिए''
प्रश्नः-
बेहद का बाप
अपने रूहानी बच्चों का वण्डरफुल सर्वेन्ट है, कैसे?
उत्तर:-
बाबा कहते
बच्चे मैं तुम्हारा धोबी हूँ, तुम बच्चों के तो क्या सारी दुनिया के छी-छी गन्दे
वस्त्र सेकेण्ड में साफ कर देता हूँ। आत्मा रूपी वस्त्र स्वच्छ बनने से शरीर भी
शुद्ध मिलता है। ऐसा वण्डरफुल सर्वेन्ट है जो मनम-नाभव के छू मन्त्र से सबको
सेकेण्ड में साफ कर देता है।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) बाप के हर डायरेक्शन पर चलकर स्वयं को कौड़ी से हीरे जैसा बनाना है।
एक बाप की याद में रह स्वयं के वस्त्रों को स्वच्छ बनाना है।
2) अब नये घर में चलना है इसलिए इस पुराने घर से बेहद का वैराग्य रखना है। नशा
रहे कि इस पुराने कब्रिस्तान पर हम परिस्तान बनायेंगे।
वरदान:-
रहम की दृष्टि
द्वारा घृणा दृष्टि को समाप्त करने वाले नॉलेजफुल भव
जो बच्चे एक दो के संस्कारों
को जानकर संस्कार परिवर्तन की लगन में रहते हैं, कभी यह नहीं सोचते कि यह तो हैं ही
ऐसे, उन्हें कहेंगे नॉलेजफुल। वे स्वयं को देखते और निर्विघ्न रहते हैं। उनके
संस्कार बाप के समान रहमदिल के होते हैं। रहम की दृष्टि, घृणा दृष्टि को समाप्त कर
देती है। ऐसे रहमदिल बच्चे कभी आपस में खिट-खिट नहीं करते। वे सपूत बनकर सबूत देते
हैं।
स्लोगन:-
सदा
परमात्म चिंतन करने वाले ही बेफिक्र बादशाह हैं, उन्हें किसी भी प्रकार की चिंता नहीं
हो सकती।
ये अव्यक्त इशारे
- एकता और विश्वास की विशेषता द्वारा सफलता सम्पन्न बनो
स्व उन्नति और सेवा
की उन्नति दोनों में एक ने कहा, दूसरे ने हाँ जी किया, ऐसे सदा एकता और दृढ़ता से
बढ़ते चलो। जैसे दादियों की एकता और दृढ़ता का संगठन पक्का है, ऐसे आप रत्नों का भी
संगठन पक्का हो, तो संगठन की शक्ति जो चाहे वह कर सकती है। संगठन की निशानी का
यादगार है पांच पाण्डव।