27-06-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - याद से आत्मा का किचड़ा निकालते जाओ, आत्मा
जब बिल्कुल पावन बनें तब घर चल सके''
प्रश्नः-
इस अन्तिम
जन्म में बाप के किस डायरेक्शन को पालन करने में ही बच्चों का कल्याण है?
उत्तर:-
बाबा कहते मीठे
बच्चे - इस अन्तिम जन्म में बाप से पूरा वर्सा ले लो। बुद्धि को बाहर में भटकाओ मत,
विष को छोड़ अमृत पियो। इस अन्तिम जन्म में ही तुम्हें 63 जन्मों की आदत मिटानी है
इसलिए रात-दिन मेहनत कर देही-अभिमानी बनो।
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
इस एक जन्म में 63 जन्मों के पुराने देह-अभिमान की आदत मिटाने की मेहनत करनी है।
देही-अभिमानी बन स्वर्ग का मालिक बनना है।
2) इस हीरे तुल्य
उत्तम जन्म में इस बुद्धि को भटकाना नहीं है, सतोप्रधान बनना है। अत्याचारों को सहन
कर बाप से पूरा वर्सा लेना है।
वरदान:-
साकार बाप
समान अपने हर कर्म को यादगार बनाने वाले आधारमूर्त और उद्धारमूर्त भव
जैसे साकार बाप ने
अपना हर कर्म यादगार बनाया ऐसे आप सभी का हर कर्म यादगार तब बनेगा जब स्वयं को
आधारमूर्त और उद्धारमूर्त समझकर चलेंगे। जो अपने को विश्व परिवर्तन के आधारमूर्त
समझते हैं, उनका हर कर्म ऊंचा होता है और वृत्ति-दृष्टि में जब सर्व के कल्याण की
भावना रहती है तो हर कर्म श्रेष्ठ हो जाता है। ऐसे श्रेष्ठ कर्म ही यादगार बनते
हैं।
स्लोगन:-
सत्यता की
शक्ति को धारण करने के लिए सहनशील बनो।
ये अव्यक्त इशारे -
सदा हर्षित रहने के लिए अपनी नेचर को सरल बनाओ, सहनशील बनो।
इस सहजयोगी जीवन में
अगर मुश्किलातों का अनुभव होता है तो सहज राज्य कैसे करेंगे। यहाँ के संस्कार ही वहाँ
ले जायेंगे। देखो, आपके यादगार जो देवताओं के चित्र बनाते हैं उनकी सूरत में सरलता
ज़रूर दिखाते हैं, तो जो जितना सहज पुरुषार्थी होगा वह मन्सा में भी सरल, वाचा में
भी सरल, कर्म में भी सरल होगा। उसको ही फरिश्ता कहते हैं।