27-10-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - अपनी बुद्धि को ज्ञान मंथन में बिजी रखो तो
सब फिकरातों से फारिग हो जायेंगे, सदा खुशी बनी रहेगी''
प्रश्नः-
जो अपने को
शिवबाबा के यज्ञ का सर्वेन्ट समझते हैं उनकी निशानी सुनाओ?
उत्तर:-
शिवबाबा इस
ब्रह्मा मुख से जो कुछ बोलेंगे, उसे वह फौरन मान लेंगे। जो कहे - उसे मानना, इसको
ही श्रीमत कहा जाता है। श्री-श्री शिवबाबा की मत पर चलने से ही तुम श्रेष्ठ बनते
हो। श्रेष्ठ बनना माना विजय माला में आना।
गीत:-
ओम् नमो शिवाए.....
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
बाप जो ज्ञान देते हैं, उसका ही सदैव मंथन करना है। युक्ति से बातें करनी है। बहुत
प्यार से समझाना है।
2) अपने पास जो कुछ
है वह जीते जी बाप को देकर ट्रस्टी बन एक बाप को याद करना है।
वरदान:-
देह-अभिमान के
मैं पन की सम्पूर्ण आहुति डालने वाले धारणा स्वरूप भव
जब संकल्प और स्वप्न
में भी देह-अभिमान का मैं पन न हो, अनादि आत्मिक स्वरूप की स्मृति हो। बाबा-बाबा का
अनहद शब्द निकलता रहे तब कहेंगे धारणा स्वरूप, सच्चे ब्राह्मण। मैं पन अर्थात्
पुराने स्वभाव, संस्कार रूपी सृष्टि को जब आप ब्राह्मण इस महायज्ञ में स्वाहा करेंगे
तब इस पुरानी सृष्टि की आहुति पड़ेगी। तो जैसे यज्ञ रचने के निमित्त बने हो, ऐसे अब
अन्तिम आहुति डाल समाप्ति के भी निमित्त बनो।
स्लोगन:-
स्वयं से, सेवा
से और सर्व से सन्तुष्टता का सर्टीफिकेट लेना ही सिद्धि स्वरूप बनना है।
ये अव्यक्त इशारे -
परोपकार की भावना से सम्पन्न बन अपकारी पर भी उपकार करो
योगी जीवन की ऊंची
मंजिल को प्राप्त करने वाली आत्मा निंदा को स्तुति में, ग्लानि को गायन में, ठुकराने
को सत्कार में, अपमान को स्व-अभिमान में, अपकार को उपकार में परिवर्तित कर बाप समान
सदा विजयी, अष्ट रत्न और भक्तों के इष्ट बनो। यह भावना नहीं रखो कि यह भी तो कुछ
बदले, तो मैं बदलूं, यह लेने की भावना है। मुझे बायब्रेशन देना है। मुझे रहमदिल बनना
है। मुझे गुणों का, शक्तियों का सहयोग देना है, इसमें मास्टर दाता, फ्राक-दिल बनो।