28-02-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम ईश्वरीय
सम्प्रदाय हो, तुम्हें ज्ञान सूर्य बाप मिला है, अभी तुम जागे हो तो दूसरों को भी
जगाओ''
प्रश्नः-
अनेक प्रकार
के टकराव का कारण तथा उसका निवारण क्या है?
उत्तर:-
जब देह-अभिमान
में आते हो तो अनेक प्रकार के टकराव होते हैं। माया की ग्रहचारी बैठती है। बाबा कहते
देही-अभिमानी बनो, सर्विस में लग जाओ। याद की यात्रा में रहो तो ग्रहचारी मिट जायेगी।
धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) भारत में सुख-शान्ति की स्थापना करने वा भारत को स्वर्ग बनाने के लिए
आपस में सेमीनार करना है, श्रीमत पर भारत की ऐसी सेवा करनी है।
2) सर्विस में उन्नति करने वा सर्विस से ऊंच पद पाने के लिए देही-अभिमानी रहने
की मेहनत करनी है। ज्ञान का विचार सागर मंथन करना है।
वरदान:-
पवित्रता के
आधार पर सुख-शान्ति का अनुभव करने वाले नम्बरवन अधिकारी भव
जो बच्चे “पवित्रता'' की
प्रतिज्ञा को सदा स्मृति में रखते हैं, उन्हें सुख-शान्ति की अनुभूति स्वत: होती
है। पवित्रता का अधिकार लेने में नम्बरवन रहना अर्थात् सर्व प्राप्तियों में
नम्बरवन बनना इसलिए पवित्रता के फाउण्डेशन को कभी कमजोर नहीं करना तब ही लास्ट सो
फास्ट जायेंगे, इसी धर्म में सदा स्थित रहना - कुछ भी हो जाए - चाहे व्यक्ति, चाहे
प्रकृति, चाहे परिस्थिति कितना भी हिलाये, लेकिन धरत परिये धर्म न छोड़िये।
स्लोगन:-
व्यर्थ
से इनोसेन्ट बनो तो सच्चे-सच्चे सेन्ट बन जायेंगे।
ये अव्यक्त इशारे
- एकता और विश्वास की विशेषता द्वारा सफलता सम्पन्न बनो
बापदादा चाहते हैं
कि हर बच्चा एकरस श्रेष्ठ स्थिति के आसनधारी, एकान्तवासी, अशरीरी, एकता स्थापक,
एकनामी, एकॉनामी का अवतार बने। एक दो के विचारों को समझ, सम्मान दे, एक दो को इशारा
दे, लेन-देन कर आपस में संगठन की शक्ति का स्वरूप प्रत्यक्ष करो क्योंकि आपके संगठन
के एकता की शक्ति सारे ब्राह्मण परिवार को संगठन में लाने के निमित्त बनेगी।