28-06-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति 30.11.2010 "बापदादा" मधुबन
हर घण्टे 5 स्वरूपों
की एक्सरसाइज़ कर मन को शक्तिशाली बनाओ, जब बाबा ही संसार है तो संस्कार भी बाप जैसे
बनाओ
वरदान:-
त्याग, तपस्या
द्वारा सेवा में सफलता प्राप्त करने वाले सर्व के कल्याणकारी भव
जैसे स्थूल अग्नि दूर
से ही अपना अनुभव कराती है, ऐसे आपकी तपस्या और त्याग की झलक दूर से ही सर्व को
आकर्षित करे। सेवाधारी के साथ-साथ त्यागी, तपस्वीमूर्त बनो तब सेवा का प्रत्यक्षफल
दिखाई देगा। त्यागी अर्थात् कोई भी पुराने संकल्प वा संस्कार दिखाई न दें। तपस्वी
अर्थात् बुद्धि की स्मृति वा दृष्टि से सिवाए आत्मिक स्वरूप के और कुछ भी दिखाई न
दे। जो भी संकल्प उठे उसमें हर आत्मा का कल्याण समाया हुआ हो तब कहेंगे सर्व के
कल्याणकारी।
स्लोगन:-
देह-भान से पार जाने के लिए चित्र को न देख चेतन और चरित्र को देखो।
ये अव्यक्त इशारे -
सदा हर्षित रहने के लिए अपनी नेचर को सरल बनाओ, सहनशील बनो।
आप सभी मास्टर
विश्व-निर्माता हो। इस स्मृति से निर्मानता का गुण सहज आ जायेगा और जहाँ निर्माणता
अर्थात् सरलता नेचुरल रूप में रहेगी वहाँ अन्य गुण भी आटोमेटिकली आ ही जाते हैं। तो
सदैव इस स्मृति स्वरूप में स्थित रहकर फिर हर संकल्प वा कर्म करो। फिर यह जो भी
छोटी-छोटी बातें सामना करने के लिए आती हैं, वह ऐसे अनुभव होंगी जैसे कोई बुजुर्ग
के आगे छोटे-छोटे बच्चे बचपन के खेल करते हैं। उसका उन्हें कोई असर नहीं होता।