28-10-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - बाबा कितनी दूर से तुम्हें पढ़ाने आते हैं,
पढ़ाई की फीस भी नहीं लेते तो कितना प्यार से पढ़ना चाहिए''
प्रश्नः-
रूहानी
गवर्मेन्ट ने सारी दुनिया के लिए यह फ्री स्कूल खोला है - क्यों?
उत्तर:-
क्योंकि सभी
आरफन, निधनके बन गये हैं। बाप ऐसे गरीब बच्चों से फीस क्या लेंगे। इस अन्तिम जन्म
में बाप ऐसी पढ़ाई पढ़ाते हैं जिससे तुम विश्व का मालिक बन जाते हो। जो नये-नये
बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं, उन्हें भी कोई घाटा नहीं होता। भल पिछाड़ी में आये हैं
लेकिन थोड़ी मेहनत कर पुरानों से भी आगे जा सकते हैं।
गीत:-
जाग सजनियाँ
जाग...
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
पूरा-पूरा नष्टोमोहा बनना है। एक शिवबाबा दूसरा न कोई, यह पाठ पक्का करना है। सपूत
बच्चा बन मात-पिता को फालो करना है।
2) बिगर कौड़ी खर्चे
पढ़ाई से 21 जन्मों की राजाई मिलती है तो बहुत लगन से पढ़ाई पढ़नी है। स्वदर्शन
चक्रधारी बनना है।
वरदान:-
सदा अपने
श्रेष्ठ भाग्य के नशे और खुशी में रहने वाले पदमापदम भाग्यशाली भव
सारे विश्व में जो भी
धर्म पितायें वा जगद्गुरू कहलाने वाले बने हैं किसी को भी मात-पिता के सम्बन्ध से
अलौकिक जन्म और पालना प्राप्त नहीं होती है। वे अलौकिक मात-पिता का अनुभव स्वप्न
में भी नहीं कर सकते और आप पदमापदमपति श्रेष्ठ आत्मायें हर रोज़ मात-पिता की वा
सर्व सम्बन्धों की यादप्यार लेने के पात्र हो। स्वयं सर्वशक्तिमान बाप आप बच्चों का
सेवक बन हर कदम में साथ निभाता है - तो इसी श्रेष्ठ भाग्य के नशे और खुशी में रहो।
स्लोगन:-
तन और मन को
सदा खुश रखने के लिए खुशी के ही समर्थ संकल्प करो।
ये अव्यक्त इशारे -
परोपकार की भावना से सम्पन्न बन अपकारी पर भी उपकार करो
बापदादा सदा श्रीमत
देते हैं कि मन में हर आत्मा के प्रति शुभ भावना और शुभ कामना रखो, अपकारी पर भी
उपकार की वृत्ति रखो - यह है स्वच्छ मन। स्वयं के प्रति वा अन्य के प्रति व्यर्थ
संकल्प आता है तो यह स्वच्छ मन नहीं है। स्वच्छ मन, क्लीन और क्लीयर बुद्धि हो तब
डबल लाइट स्थिति बन सकेगी। बाप समान स्थिति बनाने का यही सहज साधन है।