29-07-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - अपने स्वधर्म में स्थित होकर आपस में प्यार
से एक दो को ओम् शान्ति कहो - यह भी एक दो को रिगार्ड देना है''
प्रश्नः-
भक्ति में भी
भगवान को भोग लगाते हैं, यहाँ तुम बच्चे भी लगाते हो - यह रसम क्यों?
उत्तर:-
क्योंकि यह भी
उनका रिगार्ड रखना है। भल तुम जानते हो शिवबाबा निराकार है, अभोक्ता है। खाते नहीं
लेकिन वासना तो पहुँचती है। सर्व का सद्गति दाता, पतित-पावन बाप है। तो जरूर भोग भी
उनको लगाना चाहिए।
गीत:-
हमारे तीर्थ
न्यारे हैं...
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
आपस में एक दो को वा बाप को यथार्थ रिगार्ड देना है। बाप भल अभोक्ता है। लेकिन जिसके
भण्डारे से पालना होती है उसको पहले स्वीकार जरूर कराना है।
2) पूज्यनीय बनने के
लिए खुदाई खिदमतगार बनना है। बाप के साथ सेवा में मददगार बनना है। जब आत्मा और शरीर
दोनों पावन होंगे तब पूजा होगी।
वरदान:-
अपने प्रति वा
सर्व आत्माओं के प्रति लॉ फुल बनने वाले लॉ मेकर सो न्यु वर्ल्ड मेकर भव
जो स्वयं प्रति लॉ
फुल बनते हैं वही दूसरों के प्रति भी लॉ फुल बन सकते हैं। जो स्वयं लॉ को ब्रेक करते
हैं वह दूसरों के ऊपर लॉ नहीं चला सकते, इसलिए अपने आपको देखो कि सवेरे से रात तक
मन्सा संकल्प में, वाणी में, कर्म में, सम्पर्क वा एक दो को सहयोग देने में वा सेवा
में कहाँ भी लॉ ब्रेक तो नहीं होता है! जो लॉ मेकर हैं वह लॉ ब्रेकर नहीं बन सकते।
जो इस समय लॉ मेकर बनते हैं वही पीस मेकर, न्यु वर्ल्ड मेकर बन जाते हैं।
स्लोगन:-
कर्म करते
कर्म के अच्छे वा बुरे प्रभाव में न आना ही कर्मातीत बनना है।
ये अव्यक्त इशारे -
ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो
ज्वाला स्वरूप याद के
लिए मन और बुद्धि दोनों को एक तो पावरफुल ब्रेक चाहिए और मोड़ने की भी शक्ति चाहिए।
इससे बुद्धि की शक्ति वा कोई भी एनर्जी वेस्ट ना होकर जमा होती जायेगी। जितनी जमा
होगी उतना ही परखने की, निर्णय करने की शक्ति बढ़ेगी। इसके लिए अब संकल्पों का
बिस्तर बन्द करते चलो अर्थात् समेटने की शक्ति धारण करो।