29-10-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - बेहद का बाप आया है तुम बच्चों को अपने साथ
ले जाने, इसलिए अब बाप का बनकर उनकी श्रीमत पर चलो''
प्रश्नः-
बाप अपने बच्चों
की तकदीर ऊंची बनाने के लिए कौन सी श्रेष्ठ मत देते हैं?
उत्तर:-
मीठे बच्चे
मौत के पहले जितना हो सके याद में रहने का पुरुषार्थ कर लो, इससे ही तुम्हारी कमाई
है। मेरा बच्चा बनकर कभी भूल से भी कोई पाप कर्म नहीं करना। भल माया के कितने भी
तूफान आयें लेकिन पतित तो कभी नहीं बनना।
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
शिवबाबा पर पूरा-पूरा बलि चढ़ना है अर्थात् जीते जी मरना है। श्रीमत पर चलना है।
2) शिवबाबा के बच्चे
बने हैं तो कोई भी पाप का काम नहीं करना है। पवित्र बन अपना कल्याण करना है।
वरदान:-
ज्ञान की
गुह्य बातों को सुनकर उन्हें स्वरूप में लाने वाले ज्ञानी तू आत्मा भव
ज्ञानी तू आत्मायें
हर बात के स्वरूप का अनुभव करती हैं। जैसे सुनना अच्छा लगता है, गुह्य भी लगता है
लेकिन सुनने के साथ-साथ समाना अर्थात् स्वरूप बनना - इसका भी अभ्यास होना चाहिए।
मैं आत्मा निराकार हूँ - यह बार-बार सुनते हो लेकिन निराकार स्थिति के अनुभवी बनकर
सुनो। जैसी प्वाइंट वैसा अनुभव। इससे शुद्ध संकल्पों का खजाना जमा होता जायेगा और
बुद्धि इसी में बिजी होगी तो व्यर्थ संकल्पों से सहज किनारा हो जायेगा।
स्लोगन:-
नॉलेज एवं
अनुभव की डबल अथॉरिटी वाले ही मस्त फकीर रमता योगी हैं।
ये अव्यक्त इशारे -
परोपकार की भावना से सम्पन्न बन अपकारी पर भी उपकार करो
कोई भी बात फील करना
फेल की निशानी है। कितना भी कोई अपकारी हो लेकिन आपकी दृष्टि और वृत्ति उपकारी हो।
जितना अधिकारी उतना निरहंकारी। ज्ञान में चलने के बाद जो स्व अभिमान आ जाता है, उसका
भी त्याग। जब इतनी त्याग की वृत्ति और दृष्टि हो तब स्मृति में बापदादा रहेगा और
मुख पर भी यही बोल रहेंगे।