30-07-2026        प्रात:मुरली    ओम् शान्ति     "बापदादा"        मधुबन


“मीठे बच्चे - बाप जैसा निरहंकारी और निष्काम सेवाधारी कोई नहीं, सारे विश्व की बादशाही बच्चों को देकर खुद वानप्रस्थ में बैठ जाते हैं''

प्रश्नः-
बाप का कौन सा पैगाम तुम्हें सारे विश्व को बताना है?

उत्तर:-
सभी को बताओ कि तुम दु:ख हर्ता सुख कर्ता के बच्चे हो। तुम्हें कभी भी किसी को दु:ख नहीं देना है। तुम सुखदाता बाप को याद करो, उन्हें फॉलो करो तो आधाकल्प के लिए सुखधाम में चले जायेंगे। यह पैगाम सबको देना है। जो इस पैगाम को जीवन में धारण करेंगे वह 21 जन्मों के लिए माया की बेहोशी से छूट जायेंगे।

गीत:-
हमारे तीर्थ न्यारे हैं...

धारणा के लिए मुख्य सार:-
1) बाप समान ओबीडियेन्ट बनना है। कभी भी किसी बात में अपना अहंकार नहीं दिखाना है। निराकारी और निरहंकारी होकर रहना है।

2) बाप, टीचर और सतगुरू के कान्ट्रास्ट को समझ निश्चयबुद्धि बन श्रीमत पर चलना है। रूहानी यात्रा पर रहना है।

वरदान:-
पुरुषार्थ शब्द को यथार्थ रीति से यूज़ कर सदा आगे बढ़ने वाले श्रेष्ठ पुरुषार्थी भव

कई बार पुरुषार्थी शब्द भी हार खाने में वा असफलता प्राप्त होने में अच्छी ढाल बन जाता है, जब कोई भी गलती होती है तो कह देते हो हम तो अभी पुरुषार्थी हैं। लेकिन यथार्थ पुरुषार्थी कभी हार नहीं खा सकते क्योंकि पुरुषार्थ शब्द का यथार्थ अर्थ है स्वयं को पुरुष अर्थात् आत्मा समझकर चलना। ऐसे आत्मिक स्थिति में रहने वाले पुरुषार्थी तो सदैव मंजिल को सामने रखते हुए चलते हैं, वे कभी रुकते नहीं, हिम्मत उल्लास छोड़ते नहीं।

स्लोगन:-
मास्टर सर्वशक्तिमान् की स्मृति में रहो, यह स्मृति ही मालिकपन की स्मृति दिलाती है।

ये अव्यक्त इशारे - ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो

कोई भी कार्य करते वा बात करते बीच-बीच में संकल्पों की ट्रैफिक को स्टॉप करो। एक मिनट के लिए भी मन के संकल्पों को, चाहे शरीर द्वारा चलते हुए कर्म को बीच में रोक कर भी यह प्रैक्टिस करो तब बिन्दू रूप की पावरफुल स्टेज पर स्थित हो सकेंगे। जैसे अव्यक्त स्थिति में रह कार्य करना सरल होता जा रहा है वैसे ही यह बिन्दुरुप की स्थिति भी सहज हो जाये, तो यही योग की ज्वाला स्वरूप स्थिति है।