30-10-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम्हें योगबल से रावण दुश्मन पर जीत पानी
है, मनुष्य से देवता बनने के लिए दैवीगुण धारण करने हैं''
प्रश्नः-
सभी बच्चे बाप
की श्रीमत पर एक जैसा नहीं चलते हैं - क्यों?
उत्तर:-
क्योंकि बाप
जो है, उसको सभी ने एक जैसा पहचाना नहीं है। जब पूरा पहचानेंगे तब श्रीमत पर चलेंगे।
2- माया दुश्मन श्रीमत पर चलने से रोक लेती है इसलिए बच्चे बीच-बीच में अपनी मत चला
देते हैं। फिर कहते बाबा माया के तूफान आते हैं, आपकी याद भूल जाती है। बाबा कहते
बच्चे - रावण माया से डरो मत। जोर से पुरुषार्थ करो तो वह थक जायेगी।
गीत:-
न वह हमसे जुदा
होंगे...
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
योगयुक्त हो अपने हाथ से भोजन बनाना और खाना है। पवित्र दुनिया में जाने के लिए
पवित्र भोजन खाना है। उसमें ही बल है।
2) नया तन-मन-धन
प्राप्त करने के लिए पुराना सब कुछ बाप पर वारी कर देना है। इस शरीर सहित बाप पर
पूरा-पूरा कुर्बान जाना है।
वरदान:-
एकान्त और
अन्तर्मुखता के अभ्यास द्वारा स्वयं को अनुभवों से सम्पन्न बनाने वाले मायाजीत भव
नॉलेजफुल के साथ
पावरफुल अर्थात् अनुभवी मूर्त बनने के लिए एकान्तवासी और अन्तर्मुखी बनो। डगमग होने
का कारण है अनुभव की कमी इसलिए सिर्फ समझने, समझाने वाले या मननमूर्त नहीं बनो,
एकान्तवासी बन हर प्वाइंट के अनुभवी बनो तो किसी भी प्रकार के धोखे से, दु:ख वा
दुविधा से बच जायेंगे। किसका बच्चा हूँ, क्या प्राप्ति है - इस पहले पाठ का अनुभव
कर लिया तो मायाजीत सहज ही हो जायेंगे।
स्लोगन:-
जिम्मेवारी
सम्भालते हुए डबल लाइट रहने वाले ही बाप के समीप रत्न हैं।
ये अव्यक्त इशारे -
परोपकार की भावना से सम्पन्न बन अपकारी पर भी उपकार करो
अपने तीन स्वरूप सदा
स्मृति में रखो: एक उपकारी हूँ, दूसरा निरहंकारी और तीसरा अधिकारी हूँ। कितना भी
कोई अपकारी हो लेकिन आपकी दृष्टि और वृत्ति उपकारी हो, फिर जितना अधिकारी उतना
निरहंकारी। जब वृत्ति से भी मैं-पन का त्याग होगा, स्मृति में सदैव बाप और दादा
रहेगा और मुख पर भी यही बोल रहेंगे तब विश्वपति बन विश्व की सर्विस कर सकेंगे।