31-07-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - शिवबाबा को यह भी लालसा नहीं कि बच्चे बड़े
होंगे तो हमारी सेवा करेंगे, वह कभी बूढ़ा होता नहीं, बाप ही है निष्काम सेवाधारी''
प्रश्नः-
भोलानाथ
शिवबाबा हम सब बच्चों का बहुत बड़ा ग्राहक है - कैसे?
उत्तर:-
बाबा कहते मैं
इतना भोला ग्राहक हूँ, जो तुम्हारी सब पुरानी चीज़ें खरीद कर लेता और उसके रिटर्न
में सब नई-नई चीज़ें देता हूँ। तुम कहते हो बाबा यह तन-मन-धन सब आपका है तो उसकी
एवज़ में तुम्हें ब्यूटीफुल तन मिल जाता, अपार धन मिल जाता।
गीत:-
भोलेनाथ से
निराला...
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
माया के तूफानों को भगाने के लिए बाप को बहुत-बहुत प्यार से याद करना है। आत्मा को
योग अग्नि से सच्चा-सच्चा सोना बनाना है।
2) बेहद का वैरागी बन
इस पुरानी दुनिया को भूल जाना है। दुनिया बदल रही है, नई दुनिया में जाना है इसलिए
इससे संन्यास ले लेना है।
वरदान:-
कदम-कदम पर
सावधानी रखते हुए पदमों की कमाई जमा करने वाले पदमपति भव
बाप बच्चों को बहुत
ऊंची स्टेज पर रहने की सावधानी दे रहे हैं इसलिए अभी जरा भी गफलत करने का समय नहीं
है, अब तो कदम-कदम पर सावधानी रखते हुए, कदम में पदमों की कमाई करते पदमपति बनो।
जैसे नाम है पदमापदम भाग्यशाली, ऐसे कर्म भी हों। एक कदम भी पदम की कमाई के बिगर न
जाए। तो बहुत सोच-समझकर श्रीमत प्रमाण हर कदम उठाओ। श्रीमत में मनमत मिक्स नहीं करो।
स्लोगन:-
मन को आर्डर
प्रमाण चलाओ तो मन्मनाभव की स्थिति स्वत: रहेगी।
ये अव्यक्त इशारे -
ज्वालास्वरूप स्थिति में रह शक्तिशाली याद का अनुभव करो
याद को शक्तिशाली
बनाने के लिए विस्तार में जाते सार की स्थिति का अभ्यास कम न हो, विस्तार में सार
भूल न जाये। खाओ-पियो, सेवा करो लेकिन न्यारेपन को नहीं भूलो। साधना अर्थात्
शक्तिशाली याद। निरन्तर बाप के साथ दिल का सम्बन्ध। साधना इसको नहीं कहते कि सिर्फ
योग में बैठ गये लेकिन जैसे शरीर से बैठते हो वैसे दिल, मन, बुद्धि एक बाप की तरफ
बाप के साथ-साथ बैठ जाए। ऐसी एकाग्रता ही ज्वाला को प्रज्जवलित करेगी।