31-10-2026 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा" मधुबन
“मीठे बच्चे - तुम्हारे जैसा सौभाग्यशाली कोई नहीं,
क्योंकि जिस बाप को सारी दुनिया पुकार रही है वह तुम्हें पढ़ा रहे हैं, तुम उनसे
बातें करते हो''
प्रश्नः-
जिन बच्चों को
विचार सागर मंथन करना आता है, उनकी निशानी क्या होगी?
उत्तर:-
उनकी बुद्धि
में सारा दिन यही तात लगी रहती कि कैसे सबको रास्ता बतायें! कैसे किसका कल्याण करें!
वह सर्विस के नये-नये प्लैन बनाते रहते हैं। उनकी बुद्धि में सारा ज्ञान टपकता रहता
है। वे अपना टाइम वेस्ट नहीं करते।
धारणा
के लिए मुख्य सार:-
1)
जो बातें अपने काम की नहीं हैं उन्हें सुनने वा बोलने में अपना समय वेस्ट नहीं करना
है। जितना हो सके पढ़ाई पर पूरा-पूरा ध्यान देना है।
2) सदा खुशी और उमंग
में रहना है कि हमें पढ़ाने वाला कौन है। पुरुषार्थ को कभी छोड़ना नहीं है। मुख से
ज्ञान रत्न ही निकालने हैं।
वरदान:-
समझदार बन तीन
प्रकार की सेवा साथ-साथ करने वाले सफलतामूर्त भव
वर्तमान समय के
प्रमाण मन्सा-वाचा और कर्मणा तीनों प्रकार की सेवा साथ-साथ चाहिए। वाणी और कर्म के
साथ मन्सा शुभ संकल्प वा श्रेष्ठ वृत्ति द्वारा सेवा करते रहो तो फल फलीभूत हो
जायेगा क्योंकि वाणी में शक्ति तब आती है जब मन्सा शक्तिशाली हो, नहीं तो बोलने वाले
पण्डित समान हो जाते क्योंकि तोते मुआफिक पढ़कर रिपीट करते हैं। ज्ञानी अर्थात्
समझदार तीनों प्रकार की सेवा साथ-साथ करते और सफलता का वरदान प्राप्त कर लेते हैं।
स्लोगन:-
अपने हर बोल,
कर्म और दृष्टि से हर आत्मा को शान्ति, शक्ति व खुशी का अनुभव कराना ही महान आत्माओं
की महानता है।
ये अव्यक्त इशारे -
परोपकार की भावना से सम्पन्न बन अपकारी पर भी उपकार करो
जैसे होम्योपैथिक
दवाई की छोटी-छोटी गोलियां कितने बड़े रोग को खत्म कर देती हैं, ऐसे आप मास्टर
सर्वशक्तिमान् अपनी वृत्ति और दृष्टि से किसके भी कड़े संस्कार के रोग को खत्म कर
सकते हो। जैसे वह दवाई यह नहीं कहती कि रोग को कैसे मिटायें, ऐसे आप परोपकारी
आत्मायें मास्टर ज्ञान सूर्य बन सर्व आत्माओं के पतित संकल्पों वा वृत्तियों को
भस्म करने की सेवा करो, अपकारी पर भी उपकार करो।